मंदसौर जिले के शासकीय अस्पतालों का दौरा आज भी वैसा ही है जैसे पहले था लाखों-करोड़ों रुपैया शासकीय अस्पतालों पर सरकार द्वारा पानी की तरह बहाया जाता है ताकि आने वाले मरीजों को सुविधा मुहैया हो सके जिला अस्पताल में भी कोई कम सुविधा नहीं है चिकित्सकों के अभाव में मरीजों को बस रेफर रेफर और बस रेफर किया जाता रहा है जिला चिकित्सालय में आज तक मुझे तो कोई चर्म रोग विशेषज्ञ मिला ही नहीं नकुल भी किसी काम के नहीं है धनक उनसे कई बार में श्याम चर्म रोग के संबंध में मिला हूं लेकिन वह कहते हैं कि मैं इतना बड़ा डॉक्टर नहीं हूं खैर छोड़िए नाखून साहब जैसी भी सेवाएं दे रहे हैं बहुत अच्छी हैं चलिए चर्म रोग के इधर दूसरी बात करते हैं जिलेभर में स्थित सास की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की शुरुआत प्रसव पीड़ा संबंधी मामलों से करते हैं लाख डाउन के समय कलेक्टर श्री मनोज पुष्प ने कहा था कि किसी भी मरीज को अन्यत्र रेफर न किया जाए लेकिन यह क्या तीन से चार रेफर के मामले सामने आ गए जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गर्भवती महिलाओं के अपने यहां सुरक्षित प्रसव कराने में जीरो ही साबित हो रहे हैं स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ चिकित्सक क्या कर रहे हैं समझ नहीं आता गर्भवती यों को जब प्रसव का समय आता है तो शायद जानबूझकर उन्हें रेफर कर दिया जाता है क्यों लेकिन रास्ते में ही प्रसूता ओं की डिलीवरी शो जाती हैं जो कि प्रशिक्षित नर्स द्वारा करवा दी जाती है जो किसी चमत्कार से कम नहीं है अब नर्स महान है या चिकित्सक समझ से परे है जब रास्ते में प्रसूता का सुरक्षित प्रसव हो रहा है तो वह प्रसव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी तो हो सकता है लेकिन चिंता कौन पाले शायद इसी बहाने एंबुलेंस वाले का फायदा होता होगा मुझे नहीं पता एक तो प्रसूता परेशान दूसरा प्रसूता की वजह से उसका परिवार परेशान ऊपर से रेफर एंबुलेंस वाले का क्या उसे तो उसके काम से मतलब है खुशी का मौका है भाई सुरक्षित ले जाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर रहती है मिठाई चाय पानी के पैसे तो गरीब से गरीब प्रसूता का परिवार देता ही होगा अब कलेक्टर साहब के लिए सोचने वाली बात यह है कि जिस शास्त्र की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से प्रसूता को रेफर किया जाता है उसे केंद्र की एक प्रशिक्षित नर्स द्वारा बीच रास्ते में प्रसूता का सुरक्षित प्रसव करवा दिया जाता है कैसे चलो प्रसूता का परिवार तो टेंशन मुक्त हुआ चालाक नर्स और स्टाफ का भी काम हो गया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जो सुविधाएं रहती हैं तो शायद एंबुलेंस में भी वह सारी सुविधाएं करने के बाद ही प्रसूता ओं को रेफर किया जाता होगा सबका मालिक भगवान है साहब चलिए अपने क्या करना कलेक्टर साहब जाने और सास की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वाले जाने अपने तो भगवान भरोसे ही सही प्रसूता ओं का रास्ते में भी तो सुरक्षित प्रसव हो रहा है जच्चा खुश बच्चा खुश उसका परिवार खुश अपना बीच में आधी रोटी लेने से क्या काम।
गुस्ताखी माफ हुजूर ! बीच रास्ते में हो रहे हैं सुरक्षित प्रसव